पदवीधर शिक्षक , शिडवणे नं. १

Thursday, November 1, 2018

तंबाखू विरोधी हिंदी समूहगीत जिंदगी से तुम्हे प्यार है दोस्तो…..छोड दो खाना तंबाकू ऐ दोस्तो….. जानलेवा ये आदत है तंबाकूकी …..मौत की है दवा जिंदगी कि न फी …II धृ II तंबाकू से बहुत लोग बीमार है…..कुछ तो बेचारे मरने को तैयार है….. पान तंबाकू , खाकर हुए है सुखी…..कितने संसार इससे हुए है दुखी…..II १ II गर न आदत छुटी उनसे तंबाकू की…..समझो होगी तबा आपकी जिंदगी….. ये बदन की, फिजा है न मुह का मजा …..तंबाकू में है पुरे बदन कि सजा …..II २ II तंबाकू कि झलक में हि रफ्तार है…..तंदुरुस्ती की सरहद से ओ पार है….. अब तो तंबाकू, गुठखेसे बाज आओजी …..मौत की बात से लौट आ जाओजी.II ३ II दोस्ती इससे अच्छी नही दोस्तो…..साथ इसका खुदा के लिये छोड दो….. बात सरकार की, तुम जरा मानलो…..तंबाकू में दुखी मौत पहचान लो…..II ४ II संकलन : प्रवीण अशितोष कुबल . पदवीधर शिक्षक, मांगवली नं. १ ता. वैभववाडी, जि. सिंधुदुर्ग.


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